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भारत के संविधान की धज्जियाँ उड़ाते राजनैतिक दल

भारत आज एक स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में जाना जाता है । सैकड़ों वर्षों के गुलामी के पश्चात हमारा देश ब्रिटिश सम्राज्य के कुशासन से 15 अगस्त 1947 को मुक्त हुआ इस स्वतन्त्रता के लिये जिन भारतवासियों ने अपने प्राण न्योछावर किए , उनका सपना था कि हमारा देश स्वतन्त्र होकर पुनः अपनी खोई हुई प्रतिष्ठा समृद्धि ऐश्वर्य वैभव गौरव व सम्प्रभूता को प्राप्त करेगा । जिसमें हमारी भावी सन्तति सुख-शान्ति के साथ रहते हुए अपना समुचित विकास सुनिश्चित करेगी । यहाँ का हर नागरिक ससम्मान जीवन यापन करने के लिए पूर्ण स्वतन्त्र होगा । स्वतंत्र या पार्टीतंत्र । आज हमारी स्वतन्त्रता का एक लम्बा सफर तय हो चुका है , इस समय काल में हमारे देश ने भौतिक क्षेत्र में अवश्य ही काफी प्रगति की है । सड़क , बिजली , पानी , रेल , वायुयान , जलपोत , उपग्रह , तथा गगनचुम्बी इमारते आदि भारत की नई पहचान बन चुकी है , परन्तु चकाचौंध करने वाला शहरीकरण , और इसके बिपरीत उजड़ते गाँव हमें अपने जीवन की मौलिकता और सपनों से दूर कर रहे हैं । हमारी यह अप्रत्याशित प्रगति मात्र कुछ लोगों को ही सम्पन्न बनाने में सार्थक हुई और अधिकांश लोगों की ...
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मोदी बनाम अब्राहिम लिंकन । प्रिय मित्रों , आज का विषय बहुत गम्भीर और सरल भी है ,मेरे इस पोस्ट का मतलब ये कतई नहीं समझा जाना चाहिए कि मैं मोदी की भक्ति को स्वीकार किया हूँ और ये भी नहीं समझा जाना चाहिए कि मैं मोदी के विरोध में कभी नहीं जाऊँगा . मेरे ये वाक्य मेंरे दिल के उद्गार हैं । आर्थिक और सामाजिक चिंतन - अमेरिका के 16 वें राष्ट्रपति लिंकन जब अमेरिका के राष्ट्रपति बने थे तब अमेरिका में दास प्रथा बहुत जोरों से थी , पुरा अमेरिका गृह युद्ध जैसी भयावह स्थिति से गुजर रहा था , ऐसे में अमेरिका के राष्ट्रपति पर अब्राहिम लिंकन जैसे इमानदार नेता का पदासीन होना अमेरिका के भाग्योदय का कारण बना । अब मैं भारत के प्रधानमंत्री की बात करता हूं , जिस समय मोदी ने भारत के प्रधानमंत्री के पद को ग्रहण किया हर तरफ आतंकवाद और भ्रष्टाचार का बोल बाला था , जहाँ कही देखों बहीं बम फूट जाता था , कोई ऐसा बिभाग नहीं था जहाँ पर भ्रष्टाचार रूपी सर्प अपना विशालकाय फन फैलाए ना बैठा हो । मोदी के आने से इनपर अंकुश जरूर लगा , मैं यह नहीं कहता कि पुरी तरीके से भ्रष्टाचार समाप्त हो गया लेकिन डर जरूर बैठ गया लोग...