मोदी बनाम अब्राहिम लिंकन ।

प्रिय मित्रों , आज का विषय बहुत गम्भीर और सरल भी है ,मेरे इस पोस्ट का मतलब ये कतई नहीं समझा जाना चाहिए कि मैं मोदी की भक्ति को स्वीकार किया हूँ और ये भी नहीं समझा जाना चाहिए कि मैं मोदी के विरोध में कभी नहीं जाऊँगा . मेरे ये वाक्य मेंरे दिल के उद्गार हैं ।

आर्थिक और सामाजिक चिंतन -

अमेरिका के 16 वें राष्ट्रपति लिंकन जब अमेरिका के राष्ट्रपति बने थे तब अमेरिका में दास प्रथा बहुत जोरों से थी , पुरा अमेरिका गृह युद्ध जैसी भयावह स्थिति से गुजर रहा था , ऐसे में अमेरिका के राष्ट्रपति पर अब्राहिम लिंकन जैसे इमानदार नेता का पदासीन होना अमेरिका के भाग्योदय का कारण बना ।
अब मैं भारत के प्रधानमंत्री की बात करता हूं , जिस समय मोदी ने भारत के प्रधानमंत्री के पद को ग्रहण किया हर तरफ आतंकवाद और भ्रष्टाचार का बोल बाला था , जहाँ कही देखों बहीं बम फूट जाता था , कोई ऐसा बिभाग नहीं था जहाँ पर भ्रष्टाचार रूपी सर्प अपना विशालकाय फन फैलाए ना बैठा हो । मोदी के आने से इनपर अंकुश जरूर लगा , मैं यह नहीं कहता कि पुरी तरीके से भ्रष्टाचार समाप्त हो गया लेकिन डर जरूर बैठ गया लोग जो कि भ्रष्टाचार को आदत बना चुके थे और खुलेआम भ्रष्टाचार करते थे वो डरने लगे , हलांकि भ्रष्टाचार आज भी हो रहा है लेकिन इसमें लिप्त ब्यक्ति जोखिम उठाकर या चोरी छिपे ही इस कार्य को कर रहा है ।

तुलना जिस दिन लिंकन राष्ट्रपति बने थे उसी दिन ही गृह युद्ध समाप्त नहीं हो गया था और ना ही दासत्व प्रथा समाप्त हो गई थी लेकिन अंकुश जरूर लगा था । उसी प्रकार मोदी ने भी निश्चित रूप से भ्रष्टाचार और आतंकवाद पर नियंत्रण प्राप्त किया है ।और उम्मीद है कि अपने अगले कार्यकाल में मोदी जी इसपर पुरी तरीके से नियन्त्रण प्राप्त कर लेंगें बशर्ते मोदी जी इसी प्रकार से अपने आप को बनाये रखें ।

पृष्ठभूमि –

मोदी जिस पृष्ठभूमि से आते है उसी पृष्ठभूमि से लिंकन भी थे , अर्थात मोदी भी गरीब और गरीबी की निम्नतम स्थिति में थे , हलांकि ये बात मोदी जी खुल कर नहीं कहते लेकिन ये अनुमान लगाया जा सकता है कि क्या हुआ होगा ।
पढ़ार्ई का खर्च उठाने के लिये पैसा ना लिंकन के पिता के पास था और ना ही मोदी के पिता के पास था ।
घर में दो वक्त का भोजन ना लिंकन के पास था , और ना ही मोदी के पास था ।
घर की तंगी से थक हार कर लिंकन को एक सेवानिबृत्त न्यायधीश के घर नौकरी करनी पड़ी थी , वहीं मोदी को भी पेट पालने के लिये संघ के कार्यालय में झाड़ू पोछा करना पड़ा था ।
जीवन से तंग आ कर लिंकन ने कई बार आत्महत्या करने की सोची थी , तो वहीं मोदी ने जीवन से तंग आकर सन्यासी का रूप ग्रहण कर लिया था ।
पैसे के अभाव में लिंकन मीलों पैदल जाते थे , वहीं मोदी भी पैसे के अभाव में देश देशान्तर पैदल ही यात्र किया करते थे ।
प्रेमिका के वियोग में लिंकन फूट फूट कर कई वर्षों तक रोया करते थे , हमें लगता है कि आर्थिक तंगी के कारण मोदी जी की पत्नी भी उनका साथ छोड़ कर चली गई थी , जिसके कारण आज स्थिति सही होने के बाद भी उनकी जगह मोदी के घर में नहीं है ।
इमानदार छवि लिंकन की थी , जो कि उनका गरीबों के प्रति प्रेम दर्शाता है ठीक उसी प्रकार मोदी का भी अपनी तनख्वाह का पैसा गरीबों को देना इस प्रबृत्ति की तरफ दर्शाता है ।
वास्तव में अगर देखा जाए तो मोदी को नये भारत के जागरण का प्रणेता कहा जायेगा ।
ये बात अलग है कि कुछ विन्दूओं पर मेरा मोदी जी से मतभेद है जैसे कि संविधान को ठीक तरीके से मोदी जी भी नहीं लागू कर रहे हैं । लेकिन कुछ मजबूरी होगी जिसे कि मैं आकलन ही कर सकता हूँ ।
जैसे कि राजनैतिक पार्टियां संवैधानिक नहीं हैं , लेकिन यदि संवैधानिक तरीके से चुनाव आज करा दिया जाये तो फिर वही चोर उचक्के सत्ता में आ जायेगें जो कि भारत को एक नया आयाम देने कि दिशा में बाधा उत्पन्न कर सकता है ।
मोदी जी की नियत पर संदेह इस लिये नहीं किया जा सकता ,क्योंकि लालची नहीं है यदि ऐसा ना होता तो इतने लम्बे समय तक शासन में रहने के बाद इस ब्यक्ति के पास अरबों रूपये की सम्पत्ति होती जो कि कहीं भी नहीं दर्शाती है ।
देश भक्ति के मामले में यदि लिंकन से तुलना किया जाय तो भी मोदी उनके काफी समकक्ष पाये जाते हैं जैसे कि आधुनिकी करण , सशक्तिकरण , देश का मान सम्मान जिस प्रकार लिंकन ने बढ़ाया मोदी भी उसी प्रकार से आगे बढ़ा रहे हैं ।
ऐसे में मेरे आकलन के अनुसार कहीं ना कहीं नरेन्द्र मोदी लिंकन से प्रभावित दिखते हैं ।
मेरे इस पोस्ट पर मोदी भक्तों से अनुरोध है कि ये ना समझें कि मोदी की गलती पर मैं विरोध के स्वर छोड़ चुका हूं , सरकार के द्वारा यदि कहीं कोई गलत कार्य होगा मेरा विरोध सबसे पहले होगा , और मेरे विरोध पर कोई विपक्ष के कांग्रेस सपा बसपा आदि लोग ये ना समझे कि मैं उनके साथ हूँ
वास्तव में मैं सत्य के साथ था हूँ और रहूँगा ।
आपका निर्भिक साथी
रविन्द्र मणि वर्मा

Comments

Post a Comment

Popular posts from this blog

भारत के संविधान की धज्जियाँ उड़ाते राजनैतिक दल